!!1!! आर्यों ने अग्नि-हवन परम्परा के बाद निराकार प्राकृति को साकार स्वरूप इंसान को "वायु देव" बनाकर उसे पुजने की परम्परा बनाई। साथ ही प्रशाद के रूप में श्रमणों के समक्ष नसीले सो...
!! बुद्ध के भाव मे ही बुद्धी हैं और बुद्ध के अभाव में अँधविश्वास !!